"यदि हम यह कहें कि - हम गुरु के बगैर सब कुछ सीख सकते हैं तो यह हमारा अहंकार है,
और ठीक इसके विपरीत यदि कोई यह कहे कि - गुरु के बगैर कुछ भी सीखना संभव नहीं है तो यह उसका भ्रम व अहंकार है,
तथा यदि गुरु स्वयं यह कहे कि - गुरु ही एक मात्र माध्यम है सीखने का, तो यह उसका अहंकार है ...
अभिप्राय यह है कि - सीखने व जानने के लिए सर्वाधिक जरुरी कोई विषय-वस्तु है तो वह है जिज्ञासा व लालसा, जिसके अभाव में न तो हम कुछ सीख सकते हैं और न ही कोई गुरु कुछ सिखा सकता है !"
~ आचार्य उदय
और ठीक इसके विपरीत यदि कोई यह कहे कि - गुरु के बगैर कुछ भी सीखना संभव नहीं है तो यह उसका भ्रम व अहंकार है,
तथा यदि गुरु स्वयं यह कहे कि - गुरु ही एक मात्र माध्यम है सीखने का, तो यह उसका अहंकार है ...
अभिप्राय यह है कि - सीखने व जानने के लिए सर्वाधिक जरुरी कोई विषय-वस्तु है तो वह है जिज्ञासा व लालसा, जिसके अभाव में न तो हम कुछ सीख सकते हैं और न ही कोई गुरु कुछ सिखा सकता है !"
~ आचार्य उदय
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