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Monday, September 21, 2015

आनंद

"सेक्स भी प्रेम का ही एक रूप है, फुरसत के क्षणों में इसका भी भरपूर आनंद लेना चाहिए !"

~ आचार्य उदय

Sunday, August 30, 2015

शांति व ऊर्जा

"प्रेम, स्नेह, विश्वास, समर्पण, ..... व्यक्तिगत, पारिवारिक व सामाजिक जीवन के मूलभूत सिद्धांत हैं … ये सिद्धांत मन को शांति व ऊर्जा प्रदान करते हैं !"

~ आचार्य उदय

विश्वास

"जहाँ आस्था नहीं है वहाँ ईश्वर नहीं हैं, जहाँ समर्पण नहीं है वहाँ प्रेम नहीं है, ..... और ..... जहाँ विश्वास नहीं है वहाँ कुछ भी नहीं है !"

~ आचार्य उदय

Friday, August 28, 2015

प्रेम व विश्वास

"पति-पत्नी का रिश्ता शुरुवाती दौर में बेहद नाजुक होता है, या यूँ कहें कोमल पौधे की तरह होता है … इस नाजुक रिश्ते को प्रेम व विश्वास के सहारे ही मजबूत किया जा सकता है !"

~ आचार्य उदय

Sunday, August 2, 2015

अधिकार

"हमारे प्रेम पर प्रथम अधिकार उसका है जो हमें प्रेम करता है, हम जिसे या किसे प्रेम करते हैं यह अलग विषय है !"

~ आचार्य उदय

प्रेम

"प्रेम को पा लेने में प्रेम की पूर्णता नहीं है … प्रेम की पूर्णता तो प्रेम को निभाने में है !"

~ आचार्य उदय

Wednesday, July 29, 2015

मानव धर्म

"आपसी प्रेम व सौहार्द्र ही मानव धर्म है ... और समर्पण की भावना उसकी आधारशिला है !"

~ आचार्य उदय

परिवर्तनशील

"इस मायावी संसार में कोई भी चीज स्थाई नहीं है …. अच्छाई, बुराई, प्रेम, नफ़रत, सुख, दुःख, … सभी परिवर्तनशील हैं … हम भी, हमारी सोच भी … !"

~ आचार्य उदय

प्रेम

"यदि प्रेम सवालों से घिरा है, संदेहों से ग्रसित है, तो वह प्रेम नहीं है … वह भय है, भ्रम है, छल है, … प्रेम तो समर्पण है, विश्वास है, … अगर विश्वास व समर्पण नहीं है तो फिर कुछ नहीं है !"

~ आचार्य उदय

Friday, July 24, 2015

प्रेम

"जो प्रेम का आदर-सत्कार करते हैं वे जीवन भर प्रेम से लबालब रहते हैं !"
~ आचार्य उदय

Tuesday, July 21, 2015

ऊर्जा

"प्रेम में जो ऊर्जा है वो अदभुत है … वह किसी भी लक्ष्य को भेद सकती है !"

~ आचार्य उदय

Friday, July 17, 2015

पूर्णता

"प्रेम की पूर्णता जिसे हम प्रेम करते हैं उसे पा लेने में नहीं है ... वरन उसे निरंतर प्रेम करते रहने में है... क्योंकि प्रेम अमिट है, नश्वर है, अमर है !"

~ आचार्य उदय

Saturday, July 11, 2015

प्रेम

"प्रभु, आप ने कहा और हमने मान लिया कि यह मायावी संसार है, क्या प्रेम की भी कोई माया है ?
हाँ है, क्यों नहीं है … प्रेम, … प्रेम की माया … अदभुत है, विशाल है …
एक छोटा स्वरूप यह है - … प्रेम कभी दिल से शुरू होकर जिस्म पर ख़त्म होता है, तो कभी जिस्म से शुरू होकर दिल पर …
लेकिन … किन्तु … परन्तु … प्रेम तो प्रेम है जिस पर न तो पहले किसी का जोर रहा है और न ही आगे कभी रहेगा… प्रेम तो प्रेम है… !"
~ आचार्य उदय

Tuesday, June 23, 2015

सृजन

"स्त्री व पुरुष ... दो ईश्वरीय शक्तियाँ हैं जो एक-दूसरे की पूरक हैं, दोनों के परस्पर प्रेम व मिलन से ही नवीन सृजन संभव है !"

~ आचार्य उदय

ईश्वर

"प्रेम, खुशबू और ईश्वर में एक असाधारण समानता है, इन्हें देखा नहीं सिर्फ महसूस किया जा सकता है !"
~ आचार्य उदय