आचार्य उदय
Tuesday, June 23, 2015
सृजन
"स्त्री व पुरुष ... दो ईश्वरीय शक्तियाँ हैं जो एक-दूसरे की पूरक हैं, दोनों के परस्पर प्रेम व मिलन से ही नवीन सृजन संभव है !"
~ आचार्य उदय
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