आचार्य उदय
Thursday, July 2, 2015
यौनक्रीडा
"यौनक्रीडा में कहीं गौरव का भाव समाहित है तो कहीं गौरवान्वित होने का, ... किन्तु ... गर्व का कोई स्थान नहीं है !"
~ आचार्य उदय
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