Sunday, August 30, 2015

शांति व ऊर्जा

"प्रेम, स्नेह, विश्वास, समर्पण, ..... व्यक्तिगत, पारिवारिक व सामाजिक जीवन के मूलभूत सिद्धांत हैं … ये सिद्धांत मन को शांति व ऊर्जा प्रदान करते हैं !"

~ आचार्य उदय

मान-प्रतिष्ठा

"छल व बेईमानी के सहारे अपार धन संचय किया जा सकता है किन्तु मान-प्रतिष्ठा नहीं !"

~ आचार्य उदय

मन की शान्ति

"मन में विचारों की शून्यता ही मन की शान्ति है !"

~ आचार्य उदय

विश्वास

"जहाँ आस्था नहीं है वहाँ ईश्वर नहीं हैं, जहाँ समर्पण नहीं है वहाँ प्रेम नहीं है, ..... और ..... जहाँ विश्वास नहीं है वहाँ कुछ भी नहीं है !"

~ आचार्य उदय

सीख

"मूर्ख लोगों को हर समय नजरअंदाज करना उचित नहीं है … अक्सर ... उनकी हरकतें … कुछ न कुछ नई सीख अवश्य देती हैं !"

~ आचार्य उदय

विजय

"कठिन पलों व परिस्थितियों पर … विजय … सिर्फ मौन व धैर्य ही दिला सकते हैं !"

~ आचार्य उदय

भड़ास

"हार चुके लोगों पर प्रहार करना मुर्दों पे भड़ास निकालने के समान है … यह कायरों की निशानी है … ?"

~ आचार्य उदय

लालच व बेईमानी

"इस मायावी संसार में … लालच व बेईमानी ऐसी दो अदभुत शक्तियां हैं जो इंसान को अपना गुलाम बना लेती हैं … और फिर … गुलाम वही करता है जो उसका मालिक कहता है ?"

~ आचार्य उदय

ऊर्जा

"आशाओं, इच्छाओं व कल्पनाओं में … स्वयं की एक अदभुत ऊर्जा होती है … वह ऊर्जा स्वत: ही लक्ष्य की ओर अग्रसर व क्रियाशील रहती है !"

~ आचार्य उदय

घातक

"पुरुष में पुरुष होने का घमंड तथा स्त्री में स्त्री होने का भय … दोनों ही … तरक्की में बाधक हैं व समाज के लिए घातक हैं !"

~ आचार्य उदय

उत्साह

"जब तक हमारे अंदर जिज्ञासा व लालसा जागृत है ठीक तब तक ही हमारे जीवन में उत्साह है !"

~ आचार्य उदय

आनंद

"आनंद ही संतुष्टि है, आनंद ही मोक्ष है ..... जिंदगी का भरपूर आनंद लो लेकिन अनुशासन में !"

~ आचार्य उदय

स्वभाव

"अक्सर … मैंने देखा व महसूस किया है कि बहुत सारे लोगों की कुंडली में "अति-महात्वाकांक्षा व घोर-जिद्दी स्वभाव रूपी" महायोग रहता है … अक्सर ऐसे लोग अति-महात्वाकांक्षा व जिद के कारण अपने काम स्वयं ही बिगाड़ लेते हैं …

अर्थात ऐश्वर्या रॉय जैसी लड़की से शादी के चक्कर में सामने खड़ी जयाप्रदा जैसी लड़की से शादी करने से इंकार कर देते हैं परिणाम यह होता है उन्हें आजीवन कुंवारा रहना पड़ जाता है …

और जो लोग अपनी जिद्दी व अति-महात्वाकांक्षा रूपी स्वभाव पर नियंत्रण कर लेते हैं वे अच्छे व विशाल शिखर को भी छू लेते हैं अर्थात हेमा मालिनी जैसी ड्रीम गर्ल से भी शादी करने में सफल हो जाते हैं … 

इस चर्चा के पीछे मेरा अभिप्राय मात्र यह है कि - अपने स्वभाव को जाँचें-परखें … अन्यथा हाथ पे हाथ धरे बैठे जीवन भी गुजारना पड़ सकता है … !"

~ आचार्य उदय

आभार नवप्रदेश ...


शिक्षा

पति-पत्नी विवाद ...
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"अक्सर … पति-पत्नी विवाद की जड़ें … दोनों पक्षों के सास-ससुर अर्थात माता-पिता के अनावश्यक हस्तक्षेप रूपी अधिकार से जुड़ी हुई होती हैं जिनका समाधान गंभीर चिंतन-मनन से ही संभव है …
इस समस्या के समाधान के सन्दर्भ में मेरी व्यक्तिगत राय बिलकुल भिन्न व बेहुदा किस्म की है … स्वयं को मृत मानकर रिश्ते का भोग आरम्भ करें, मन को शांति व संतुष्टि भी मिलेगी और रिश्ता टूटेगा भी नहीं …
स्वयं को मृत कैसे मानें व भोग कैसे आरम्भ करें यह एक विस्तृत गंभीर विषय है जिस पर विस्तार से चर्चा फिर किसी दिन करने का प्रयास करूंगा … किन्तु … परन्तु … समस्या … समाधान … कलयुग …
इस सन्दर्भ में देवी सती व देव शिव का पति-पत्नी रूपी साक्षात व सत्य घटनाक्रम एक बेहद सटीक व शिक्षाप्रद उदाहरण है जिससे वर्त्तमान पति-पत्नी न जाने क्यों कुछ शिक्षा नहीं लेते हैं ... !"

~ आचार्य उदय

परिस्थितियाँ

"यह जरुरी नहीं है कि परिस्थितियाँ हमेशा ही अनुकूल मिलें, हमें कठिन परिस्थितियों में भी अपनी योजनाओं व कल्पनाओं को साकार करने का प्रयास करते रहना चाहिये !"

~ आचार्य उदय

सपने

"जब हमारी जेब में पैसे नहीं होते हैं तब हम कुछ भी खरीदने की स्थिति में नहीं होते हैं ... लेकिन ... उस समय भी हमारे दिल-और-दिमाग में खुशियों व योजनाओं के अंबार होते हैं ... अगर हम चाहें तो लोगों को सुनहरे सपने बेच सकते हैं !"

~ आचार्य उदय

मोक्ष

"संतोष ही सच्चा मोक्ष है !"

~ आचार्य उदय

स्वभाव

"स्वभाव में सहजता व सरलता हजारों तालों की इकलौती चाबी है … जिन्हें यकीन नहीं है वे आजमा के देख सकते हैं !"

~ आचार्य उदय

कोल्हू के बैल

"जो लक्ष्य विहीन हैं … उनका जीवन कोल्हू के बैल से भिन्न नहीं है !"

~ आचार्य उदय

त्याग

"भृष्टाचार से अर्जित सम्पत्ति परिवार का नाश करती है, अत: भृष्टाचार का त्याग करें !"

~ आचार्य उदय

Friday, August 28, 2015

जहर

"माया, मोह और वासना … आध्यात्मिक व धार्मिक गुरुओं के लिए जहर के समान हैं !"

~ आचार्य उदय

महत्वपूर्ण

"हम … गुरु हैं या शिष्य हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है … हमारे जीवन में अगर कुछ महत्वपूर्ण है तो वो है कि हमारे जीवन में … शांति कितनी है …धैर्य कितना है … संतोष कितना है …सौंदर्य कितना है …मनोरम कितना है …खुशबू कितनी है …प्रकाश कितना है …
अगर ये सब नहीं है तो फिर कुछ नहीं है …शिष्य होना भी कुछ नहीं है, गुरु होना भी कुछ नहीं है !"

~ आचार्य उदय

ललक

"सीखने की ललक.....हमें वह शक्ति प्रदान करती है जिसके सहारे हम सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड तक की सैर कर सकते हैं !"

~ आचार्य उदय

नीतियाँ

"कठिन परिस्थितियों में … व्यक्तिगत सिद्धांतों की अपेक्षा … समझौतावादी नीतियाँ ज्यादा कारगर सिद्ध होती हैं !"

~ आचार्य उदय

एकाएक

"जिस प्रकार ... मुट्ठी से धीरे धीरे रेत खिसकती है ठीक उसी प्रकार धन, भाग्य, आबरू और उम्र … बहुत ही कम अवसरों पर ये घटनाएँ एकाएक होती हैं … !" 

~ आचार्य उदय

प्रेम व विश्वास

"पति-पत्नी का रिश्ता शुरुवाती दौर में बेहद नाजुक होता है, या यूँ कहें कोमल पौधे की तरह होता है … इस नाजुक रिश्ते को प्रेम व विश्वास के सहारे ही मजबूत किया जा सकता है !"

~ आचार्य उदय

पैसा हाथ का मैल नहीं, हाथ की खुशबू है !

"जो लोग यह कहते हैं कि … पैसा हाथ का मैल है … वे अज्ञानी हैं, भ्रमित हैं, मूर्ख हैं … क्योंकि पैसा हाथ का मैल नहीं … हाथ की खुशबू है, … जब तक हाथ में खुशबू रहेगी … ये मायावी संसार आपका रहेगा, आप इस मायावी संसार के रहेंगे … ठीक तब तक ही … भाई रहेगा, भतीजा रहेगा, दोस्त रहेगा, यार रहेगा … जिस दिन ये खुशबू हाथ से गई … तो यह समझ लेना की ये मायावी संसार आपके हाथ से निकल गया, …
दोस्तो … पैसा हाथ का मैल नहीं, हाथ की खुशबू है !" 

~ आचार्य उदय

सृजन

"शिवलिंग … अर्थात शिव-शक्ति का मिलन … अर्थात … सम्भोग मुद्रा ही शिवलिंग है … यह स्त्री व पुरुष की पूर्णता, एकाकार व नवीन सृजन का प्रतीक है !"

~ आचार्य उदय

आभार नवप्रदेश ...


Sunday, August 2, 2015

विनाश काले विपरीत बुद्धि !

विनाश काले विपरीत बुद्धि ... अक्सर यह कहावत सुनते आया हूँ ... विगत दिनों यह कहावत चरितार्थ होते दिखी, हुआ दरअसल यह कि - लगभग एक माह पूर्व एक मित्र अचानक सुबह सुबह मेरे घर पर नजर आये ... बात-चीत में स्पष्ट हुआ कि वो पास में ही किसी से मिलने आये थे किन्तु मिलने के समय में कुछ विलम्ब था तो वे मेरे घर चले आये ... बैठकर चाय पीते-पीते चर्चा हुई तो उसने अपने व्यवहारिक जीवन की कठिनाइयों का जिक्र किया तो मैंने पूछा "जन्म कुण्डली" होगी तो लाकर दिखाओ ... हो सकता है मैं कुछ मदद कर सकूँ ... उसने कहा ठीक है कल सुबह लेकर आता हूँ, जाते-जाते मैंने एक कागज़ के तुकडे पर उससे उसका जन्म समय, दिनांक व् स्थान पूँछ कर नोट कर लिया !

अब आप ये सोच रहे होंगे कि इस आकस्मिक दिनचर्या का इस कहावत - "विनाश काले विपरीत बुद्धि" से क्या लेना-देना है, तो चलो चलते हैं इस कहावत की ओर ... हुआ दरअसल ये कि वो मित्र तो नहीं आये ... फिर दो-तीन दिन बाद जब मैं कम्प्यूटर पर बैठा हुआ था तब अचानक उस मित्र का ध्यान आया तो मैंने नोट किये गए उसके जन्म दिनांक, समय व स्थान के आधार पर कम्प्यूटर पर उसकी कुण्डली देखी तो मैं हतप्रभ रह गया, हतप्रभ होने की वजह उसकी कुण्डली में विराजमान एक अशुभ योग था ... अशुभ योग भी ऐंसा जो उसके व्यवहारिक जीवन में सफलताओं के मार्ग में अड़ंगा लगा रहा था अर्थात काम होते-होते बिगाड़ रहा था !

चलो अब हम मूल विषय - "विनाश काले विपरीत बुद्धि" पर पहुँच रहे हैं कुण्डली देखते देखते मैंने उस मित्र को फोन लगाया फोन स्वीच्ड ऑफ मिला, दूसरे दिन लगाया तब भी स्वीच्ड ऑफ ... इस तरह मैं आठ-दस दिन लगातार उससे फोन पर संपर्क करने का प्रयास करता रहा किन्तु हर बार स्वीच्ड ऑफ - स्वीच्ड ऑफ से प्रयास असफल ही रहा ! फोन लगाने के पीछे मेरा उद्देश्य मात्र इतना था कि मित्र होने के नाते मैं उसे दो-तीन छोटे-मोटे उपाय बता देता जिसके अमल में लाने से उसके व्यवहारिक जीवन की कठिनाईयां दूर हो जातीं, किन्तु ऐंसा हो नहीं सका !

तभी मेरे जेहन में यह कहावत - "विनाश काले विपरीत बुद्धि" बिजली की तरह कौंध पड़ी ... मेरा अभिप्राय यह है कि - संभव है उसने उक्त मोबाइल नंबर बंद करके नया नंबर ले लिया हो, अब ईश्वर ही जाने कब मुलाक़ात हो !

ओवरआल, मेरा तात्पर्य यह है कि एक तो वो मित्र अचानक मिला, चर्चा हुई, उसकी समस्या का समाधान नजर आया, किन्तु नतीजे सिफर ! खैर, अब जिस दिन मुलाक़ात होगी, चर्चा होगी तब देखेंगे ... फिलहाल तो ऐंसा प्रतीत हो रहा है कि मुश्किल घड़ी में मुश्किलों से निजात पाने का उपाय मिल सकता था किन्तु ठीक उसके पहले ही बुद्धि विपरीत हो गई … नहीं तो विनाश से अर्थात मुश्किलों से बचने का प्रयास प्रारम्भ हो जाता ... इससे जाहिर होता है कि कहावत सच ही है "विनाश काले विपरीत बुद्धि" !!

~ आचार्य उदय

अधिकार

"हमारे प्रेम पर प्रथम अधिकार उसका है जो हमें प्रेम करता है, हम जिसे या किसे प्रेम करते हैं यह अलग विषय है !"

~ आचार्य उदय

मित्रता

"जो संदेहों व स्वार्थों से परे है वही सच्ची मित्रता है !"

~ आचार्य उदय

प्रेम

"प्रेम को पा लेने में प्रेम की पूर्णता नहीं है … प्रेम की पूर्णता तो प्रेम को निभाने में है !"

~ आचार्य उदय

भोग व योग

"भोग व योग … दोनों का प्रतिफल संतुष्टि प्रदायक है ... फर्क है तो सिर्फ इतना है कि … भोग का प्रतिफल क्षणिक व व्यक्तिगत है ... तो दूसरी ओर योग का प्रतिफल व्यापक होने के साथ साथ व्यक्तिगत व सामाजिक दोनों है !"

~ आचार्य उदय

काल सर्प योग ... मरता क्या न करता !

काल सर्प योग ... उफ़ ! नाम सुनते ही ... ऐंसा प्रतीत होता है जैसे यह नाम किसी भूकंप, भूचाल, तूफ़ान, सुनामी, बवंडर, इत्यादि का कोई पर्यायवाची नाम हो ! ... अब क्या कहूँ, भले यह नाम पर्यायवाची नाम नहीं है परन्तु यह नाम " कालसर्प योग" ज्योतिष में अपने आप में इनमें से किसी नाम से कम भी नहीं है ! यहाँ संक्षिप्त में यह स्पष्ट कर दूँ कि राहु और केतु के बीच में शेष समस्त ग्रहों का आ जाना ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प योग माना गया है !

ात दरअसल यह है कि - जब कभी भी माता-पिता या परिजन अपने बच्चों की कुण्डली किसी विद्धान ज्योतिषी को दिखाते हैं और जब वह विद्धान ज्योतिषी कुण्डली देखकर कुछ इस ढंग से यह बताता है कि आपके बच्चे की कुण्डली में "कालसर्प योग अर्थात कालसर्प दोष" है तो सुनते ही कुछ पल के लिए उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक-सी जाती है ... और जब पैरों के नीचे से जमीन खिसक-सी गई हो तब विद्धान ज्योतिष उन्हें जो उपाय बताता या सुझाता है वे उसे राजी-खुसी मानने के लिए तैयार हो जाते हैं ... व्यहवहारिक शब्दों में कहा जाये तो … "मरता क्या न करता" ?

और ज्यादा क्या कहूँ, कुछ इसी तरह ही ढेर सारे विद्धान ज्योतिषियों की दुकानें चल रही हैं, फल-फूल रही हैं ! ... सीधे शब्दों में कहा जाए तो, यह भी "भय और भ्रम" का एक अदभुत ज्योतिषीय नजारा है ! मेरे व्यक्तिगत नजरिये से इस "योग अर्थात दोष" का कहीं कोई भयाभय सिर-पैर नहीं है ... वो इसलिये कि - मुझे तो आज तक यह समझ नहीं आया कि स्वयंभू विद्धान ज्योतिषी क्यों इसे "दोष योग" की संज्ञा देते हैं, देते आ रहे हैं जबकि मुझे तो यह हर नजर से "शुभ योग" ही नजर आता है !!

मेरा अभिप्राय यह है कि यह "अशुभ योग" न होकर एक अत्यंत प्रभावकारी "शुभ योग" है, इसे देखकर न तो मैं स्वयं डरता हूँ और न ही किसी को डराने का प्रयास करता, किन्तु यहाँ मैं इतना जरुर स्पष्ट करना चाहूँगा कि - जब कुण्डली में "कालसर्प योग" हो तब काफी गहन अध्ययन के बाद ही इस योग के सन्दर्भ में फलादेश अर्थात दिशा निर्देश देने की आवश्यकता है, ताकि इस योग के प्रतिफल स्वरूप जातक अपने लक्ष्यों को सहजता से सकारात्मक ढंग से प्राप्त कर सके !!

~ आचार्य उदय

अश्लीलता

"अश्लीलता वह है … जिसे हम, हमारा मन, हमारी विचारधारा अश्लील मान रही है अन्यथा संसार की कोई भी वस्तु, तस्वीर, संस्कृति, परंपरा, हाव-भाव … अपने आप में अश्लील नहीं है !"

~ आचार्य उदय