"शिक्षा के प्रति हमारा नजरिया सिर्फ दो प्रकार का होना चाहिए … सीखने
वाले के लिए कर्तव्य का .... तथा सिखाने वाले के लिए दायित्व का … शिक्षा
के क्षेत्र में सुविधा ( सुविधा का अभाव है, सुविधा उपलब्ध कराई गई है )
जैसे शब्दों का उपयोग एक प्रकार से अपने अपने कर्तव्यों व दायित्वों से
पल्ला झाड़ने के सामान है !"
"Nothing is in your hand and nothing is our strategy ... we all are
working on to fulfill of God's strategy ... reality is, we are an Actor
and God is Director ... what is the climax and what is the goal of our
life that is always surprising !"
"जब हमारा स्वार्थीपन हमारे व्यवहार में झलकने लगे, तब हमें स्वमेव यह
समझ जाना चाहिए कि - अब हम अकेले हैं … अर्थात अब कोई ... दिल से हमारे साथ
नहीं है !"