"मनुष्य
जीवन का ... कोई भी लक्ष्य अंतिम लक्ष्य नहीं है ... क्योंकि हर एक लक्ष्य
की पूर्णता में ... एक नवीन लक्ष्य की रूपरेखा छिपी होती है ... ज्यों ही
हम एक लक्ष्य पर पहुंचते हैं त्यों ही दूसरे नवीन लक्ष्य के मार्ग में
प्रवेश कर लेते हैं ... यही प्रकृति है, यही प्रकृति का सच है !"
~ आचार्य उदय
~ आचार्य उदय
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