काल सर्प
योग ... उफ़ ! नाम सुनते ही ... ऐंसा प्रतीत होता है जैसे यह नाम किसी
भूकंप, भूचाल, तूफ़ान, सुनामी, बवंडर, इत्यादि का कोई पर्यायवाची नाम हो !
... अब क्या कहूँ, भले यह नाम पर्यायवाची नाम नहीं है परन्तु यह नाम "
कालसर्प योग" ज्योतिष में अपने आप में इनमें से किसी नाम से कम भी नहीं है !
यहाँ संक्षिप्त में यह स्पष्ट कर दूँ कि राहु और केतु के बीच में शेष
समस्त ग्रहों का आ जाना ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प योग माना गया है !
बात दरअसल यह है कि - जब कभी भी माता-पिता या परिजन अपने बच्चों की कुण्डली किसी विद्धान ज्योतिषी को दिखाते हैं और जब वह विद्धान ज्योतिषी कुण्डली देखकर कुछ इस ढंग से यह बताता है कि आपके बच्चे की कुण्डली में "कालसर्प योग अर्थात कालसर्प दोष" है तो सुनते ही कुछ पल के लिए उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक-सी जाती है ... और जब पैरों के नीचे से जमीन खिसक-सी गई हो तब विद्धान ज्योतिष उन्हें जो उपाय बताता या सुझाता है वे उसे राजी-खुसी मानने के लिए तैयार हो जाते हैं ... व्यहवहारिक शब्दों में कहा जाये तो … "मरता क्या न करता" ?
बात दरअसल यह है कि - जब कभी भी माता-पिता या परिजन अपने बच्चों की कुण्डली किसी विद्धान ज्योतिषी को दिखाते हैं और जब वह विद्धान ज्योतिषी कुण्डली देखकर कुछ इस ढंग से यह बताता है कि आपके बच्चे की कुण्डली में "कालसर्प योग अर्थात कालसर्प दोष" है तो सुनते ही कुछ पल के लिए उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक-सी जाती है ... और जब पैरों के नीचे से जमीन खिसक-सी गई हो तब विद्धान ज्योतिष उन्हें जो उपाय बताता या सुझाता है वे उसे राजी-खुसी मानने के लिए तैयार हो जाते हैं ... व्यहवहारिक शब्दों में कहा जाये तो … "मरता क्या न करता" ?
और
ज्यादा क्या कहूँ, कुछ इसी तरह ही ढेर सारे विद्धान ज्योतिषियों की दुकानें
चल रही हैं, फल-फूल रही हैं ! ... सीधे शब्दों में कहा जाए तो, यह भी "भय
और भ्रम" का एक अदभुत ज्योतिषीय नजारा है ! मेरे व्यक्तिगत नजरिये से इस
"योग अर्थात दोष" का कहीं कोई भयाभय सिर-पैर नहीं है ... वो इसलिये कि -
मुझे तो आज तक यह समझ नहीं आया कि स्वयंभू विद्धान ज्योतिषी क्यों इसे "दोष
योग" की संज्ञा देते हैं, देते आ रहे हैं जबकि मुझे तो यह हर नजर से "शुभ
योग" ही नजर आता है !!
मेरा अभिप्राय यह है कि यह "अशुभ योग" न होकर एक अत्यंत प्रभावकारी "शुभ योग" है, इसे देखकर न तो मैं स्वयं डरता हूँ और न ही किसी को डराने का प्रयास करता, किन्तु यहाँ मैं इतना जरुर स्पष्ट करना चाहूँगा कि - जब कुण्डली में "कालसर्प योग" हो तब काफी गहन अध्ययन के बाद ही इस योग के सन्दर्भ में फलादेश अर्थात दिशा निर्देश देने की आवश्यकता है, ताकि इस योग के प्रतिफल स्वरूप जातक अपने लक्ष्यों को सहजता से सकारात्मक ढंग से प्राप्त कर सके !!
~ आचार्य उदय
मेरा अभिप्राय यह है कि यह "अशुभ योग" न होकर एक अत्यंत प्रभावकारी "शुभ योग" है, इसे देखकर न तो मैं स्वयं डरता हूँ और न ही किसी को डराने का प्रयास करता, किन्तु यहाँ मैं इतना जरुर स्पष्ट करना चाहूँगा कि - जब कुण्डली में "कालसर्प योग" हो तब काफी गहन अध्ययन के बाद ही इस योग के सन्दर्भ में फलादेश अर्थात दिशा निर्देश देने की आवश्यकता है, ताकि इस योग के प्रतिफल स्वरूप जातक अपने लक्ष्यों को सहजता से सकारात्मक ढंग से प्राप्त कर सके !!
~ आचार्य उदय
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