Tuesday, July 21, 2015

ज्योतिष रूपी लाठी हाँथ में लेने में हर्ज ही क्या है ?

मित्रो, अक्सर मैंने सुना व पढ़ा है कि - ज्योतिष पाखण्ड से जियादा कुछ भी नहीं है, … हालांकि मैंने कभी इस विषय पर किसी के साथ तर्क-वितर्क करने की कोशिश नहीं की, और न ही किसी के साथ तर्क-वितर्क करने का भविष्य में कोई इरादा है ... वजह ? ... वजह कोई ख़ास नहीं है, मैं मानता हूँ कि वर्त्तमान समय में लोगों के समक्ष यदि साक्षात 'ईश्वर' भी आ जाएँ तो भी लोग उन्हें 'ईश्वर' मानने से इंकार कर दें, … या फिर उन्हें अर्थात ईश्वर को स्वयं ऐंसी किसी कसौटी पे खरा उतरना पड़े कि उसके बाद उन्हें भगवान मानने के अलावा लोगों के पास कोई और विकल्प ही न बचे !

ठीक ऐंसा की घालमाल लोगों के जेहन में ज्योतिष के प्रति भी है, सिर्फ ज्योतिष ही क्यों ! ऐंसी स्थिति तमाम जगहों पर है, ... उदाहरण के तौर पर अपने ही देश में ऐंसे तमाम मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे, मजार, नदी, वृक्ष, पहाड़, इत्यादि स्थल हैं जहाँ एक ओर तो लाखों-करोड़ों लोग श्रद्धा व विश्वास के साथ माथा टेकते हैं, तो वहीं दूसरी ओर ढेरों लोग ऐंसे भी हैं जो उनकी कटु आलोचना करने से भी पीछे नहीं हटते, और-तो-और इन पवित्र स्थलों को भी बहुत से लोग ढोंग व पाखण्ड से ज्यादा कुछ नहीं मानते !

खैर, लोगों के व्यक्तिगत विचारों, रुझानों, समर्थनों, विरोधों, इत्यादि पर चर्चा करने का मेरा मकसद नहीं है, और न ही किसी को झूठा-सच्चा सिद्ध करना मेरा मकसद है ... लोगों के अपने-अपने तर्क, कुतर्क, वितर्क हैं जिन पर हर किसी का अपना अपना अधिकार है, … इस विषय पर मेरा चर्चा करने का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि - ज्योतिष कोई ढोंग या पाखण्ड नहीं है वरन जांचा, परखा, व प्रयोग में लाया गया व लाया जा रहा एक सटीक विज्ञान है !

ज्योतिषरूपी विज्ञान अर्थात शास्त्र भले ही हमें भविष्य की गर्त में छिपी मंजिलों पर पहुँचने के लिये नेशनल हाइवे रूपी पक्की सड़क का मार्ग प्रशस्त न करे किन्तु एक पगडंडी रूपी कच्ची गली दिखाने में जरुर सहायक है, कौन जानता है वह कच्ची गली आगे चलकर स्वत: ही नेशनल हाइवे का रूप ले ले ... मेरे कहने का अभिप्राय यह है कि जब हमें भविष्यरूपी अंधकार अथवा उजाले में प्रवेश करना ही है तो सहारे के तौर पर ज्योतिष रूपी लाठी हाँथ में लेने में हर्ज ही क्या है ???

~ आचार्य उदय

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