Friday, July 31, 2015

माया

"मित्रो, यह संसार एक मायावी संसार है … इस संसार की माया अपरम्पार है … उदाहरण के तौर पर … जिसके पास भूख है उसके पास अन्न नहीं है और जिसके पास अन्न के भण्डार भरे पड़े हैं उसे भूख नसीब नहीं है … अर्थात जिसके पास दाँत हैं उसके पास चने नहीं हैं और जिसके पास चने हैं उसके पास दाँत नहीं हैं … सब माया है …

लेकिन इसका अभिप्राय यह नहीं है कि आनंद नहीं है … चँहू ओर आनंद ही आनंद है … जो इस माया को समझ गया सो समझो वह तर गया, और जो नहीं समझा तो नहीं समझा … खैर, मेरा मानना तो यह है कि यह संसार एक पहेली जैसा है जिसने पहेली बूझ ली वह आनंद में है और जो नहीं बबूझ पाया वह भटक रहा है …

इतिहास में बहुत ही कम लोग हैं जिन्होंने समय रहते इस पहेली अर्थात माया को समझा है और उसका आनंद उठाया है … जो समझ गया उसने आनंद उठा लिया और जो नहीं समझा … खैर, फिलहाल तो आपकी, हमारी, हम सब की बारी है … मायावी संसार … माया … आनंद … जय हो !"

~ आचार्य उदय

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