Monday, June 29, 2015

लक्ष्य

"निठल्ले बैठे लोग भी अक्सर बैठे-बैठे थक जाते हैं … जब थकना ही है तो क्यूँ न कुछ काम कर के थका जाए, किसी लक्ष्य की ओर बढ़ा जाए … ?"

~ आचार्य उदय

धर्म-अधर्म क्या है ?

धर्म-अधर्म क्या है ?
"मानव धर्म व मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो ... धर्म व अधर्म की बेहद संक्षिप्त परिभाषा है ... सदभावना पूर्ण ढंग से किये गये कार्य धर्म हैं ... तथा दुर्भावना पूर्ण ढंग से किये गये कार्य अधर्म हैं !"

~ आचार्य उदय

प्रिंट मीडिया


Friday, June 26, 2015

सीख

"इस मायावी संसार में ... प्रचलित किसी भी विधा, किसी भी धर्म, किसी भी संस्कृति को नजर अंदाज करने का तात्पर्य ... स्वयं को कुछ सीखने अथवा जानने से वंचित करना है !"

~ आचार्य उदय

लक्ष्य

"स्वतंत्रता ... हमें कमजोर बना सकती है, हमें अपने लक्ष्य से भटका सकती है ... अत: हमें सदैव अपने लक्ष्य के बंधन में बंधे रहना चाहिये !"

~ आचार्य उदय

Thursday, June 25, 2015

मित्रता

"सच्ची मित्रता वह नहीं जो मित्र की पुकार का इंतज़ार करे बल्कि सच्ची मित्रता तो वह है जो मित्र की चीख अथवा कराह सुनकर ही मदद के लिए दौड़ पड़े !"

~ आचार्य उदय

Tuesday, June 23, 2015

सृजन

"स्त्री व पुरुष ... दो ईश्वरीय शक्तियाँ हैं जो एक-दूसरे की पूरक हैं, दोनों के परस्पर प्रेम व मिलन से ही नवीन सृजन संभव है !"

~ आचार्य उदय

ईश्वर

"प्रेम, खुशबू और ईश्वर में एक असाधारण समानता है, इन्हें देखा नहीं सिर्फ महसूस किया जा सकता है !"
~ आचार्य उदय

महान

"रंग, रूप, आकार, जाति, धर्म, संप्रदाय, मनुष्य की पहचान बन सकते हैं किंतु ये मनुष्य को महान नहीं बना सकते !"
~ आचार्य उदय

गुरु

" गुरु सिर्फ वह नहीं होता जो हमें प्रत्यक्ष रूप से शिक्षा देता है बल्कि गुरु वह भी है जिससे हम अप्रत्यक्ष रूप से कुछ सीख लेते हैं !"
~ आचार्य उदय