धर्म-अधर्म क्या है ?
"मानव धर्म व मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो ... धर्म व अधर्म की बेहद
संक्षिप्त परिभाषा है ... सदभावना पूर्ण ढंग से किये गये कार्य धर्म हैं
... तथा दुर्भावना पूर्ण ढंग से किये गये कार्य अधर्म हैं !"
"इस
मायावी संसार में ... प्रचलित किसी भी विधा, किसी भी धर्म, किसी भी
संस्कृति को नजर अंदाज करने का तात्पर्य ... स्वयं को कुछ सीखने अथवा जानने
से वंचित करना है !"