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Monday, September 21, 2015

स्वार्थ व अहंकार

"हमें व्यक्तिगत स्वार्थों व अहंकारों को सच्ची मित्रता से दूर रखना चाहिए अन्यथा मित्रता मित्रता न रहकर शत्रुता का रूप ले लेगी !"

~ आचार्य उदय

Sunday, August 2, 2015

विनाश काले विपरीत बुद्धि !

विनाश काले विपरीत बुद्धि ... अक्सर यह कहावत सुनते आया हूँ ... विगत दिनों यह कहावत चरितार्थ होते दिखी, हुआ दरअसल यह कि - लगभग एक माह पूर्व एक मित्र अचानक सुबह सुबह मेरे घर पर नजर आये ... बात-चीत में स्पष्ट हुआ कि वो पास में ही किसी से मिलने आये थे किन्तु मिलने के समय में कुछ विलम्ब था तो वे मेरे घर चले आये ... बैठकर चाय पीते-पीते चर्चा हुई तो उसने अपने व्यवहारिक जीवन की कठिनाइयों का जिक्र किया तो मैंने पूछा "जन्म कुण्डली" होगी तो लाकर दिखाओ ... हो सकता है मैं कुछ मदद कर सकूँ ... उसने कहा ठीक है कल सुबह लेकर आता हूँ, जाते-जाते मैंने एक कागज़ के तुकडे पर उससे उसका जन्म समय, दिनांक व् स्थान पूँछ कर नोट कर लिया !

अब आप ये सोच रहे होंगे कि इस आकस्मिक दिनचर्या का इस कहावत - "विनाश काले विपरीत बुद्धि" से क्या लेना-देना है, तो चलो चलते हैं इस कहावत की ओर ... हुआ दरअसल ये कि वो मित्र तो नहीं आये ... फिर दो-तीन दिन बाद जब मैं कम्प्यूटर पर बैठा हुआ था तब अचानक उस मित्र का ध्यान आया तो मैंने नोट किये गए उसके जन्म दिनांक, समय व स्थान के आधार पर कम्प्यूटर पर उसकी कुण्डली देखी तो मैं हतप्रभ रह गया, हतप्रभ होने की वजह उसकी कुण्डली में विराजमान एक अशुभ योग था ... अशुभ योग भी ऐंसा जो उसके व्यवहारिक जीवन में सफलताओं के मार्ग में अड़ंगा लगा रहा था अर्थात काम होते-होते बिगाड़ रहा था !

चलो अब हम मूल विषय - "विनाश काले विपरीत बुद्धि" पर पहुँच रहे हैं कुण्डली देखते देखते मैंने उस मित्र को फोन लगाया फोन स्वीच्ड ऑफ मिला, दूसरे दिन लगाया तब भी स्वीच्ड ऑफ ... इस तरह मैं आठ-दस दिन लगातार उससे फोन पर संपर्क करने का प्रयास करता रहा किन्तु हर बार स्वीच्ड ऑफ - स्वीच्ड ऑफ से प्रयास असफल ही रहा ! फोन लगाने के पीछे मेरा उद्देश्य मात्र इतना था कि मित्र होने के नाते मैं उसे दो-तीन छोटे-मोटे उपाय बता देता जिसके अमल में लाने से उसके व्यवहारिक जीवन की कठिनाईयां दूर हो जातीं, किन्तु ऐंसा हो नहीं सका !

तभी मेरे जेहन में यह कहावत - "विनाश काले विपरीत बुद्धि" बिजली की तरह कौंध पड़ी ... मेरा अभिप्राय यह है कि - संभव है उसने उक्त मोबाइल नंबर बंद करके नया नंबर ले लिया हो, अब ईश्वर ही जाने कब मुलाक़ात हो !

ओवरआल, मेरा तात्पर्य यह है कि एक तो वो मित्र अचानक मिला, चर्चा हुई, उसकी समस्या का समाधान नजर आया, किन्तु नतीजे सिफर ! खैर, अब जिस दिन मुलाक़ात होगी, चर्चा होगी तब देखेंगे ... फिलहाल तो ऐंसा प्रतीत हो रहा है कि मुश्किल घड़ी में मुश्किलों से निजात पाने का उपाय मिल सकता था किन्तु ठीक उसके पहले ही बुद्धि विपरीत हो गई … नहीं तो विनाश से अर्थात मुश्किलों से बचने का प्रयास प्रारम्भ हो जाता ... इससे जाहिर होता है कि कहावत सच ही है "विनाश काले विपरीत बुद्धि" !!

~ आचार्य उदय

मित्रता

"जो संदेहों व स्वार्थों से परे है वही सच्ची मित्रता है !"

~ आचार्य उदय

Wednesday, July 29, 2015

शिक्षा

"जो शिक्षा … व्यवहारिक जीवन में बुद्धिमान, धूर्त व मूर्ख मित्रों के … बुद्धिमतापूर्ण, धूर्ततापूर्ण व मूर्खतापूर्ण आचरण व व्यवहार से मिल सकती है … वह शिक्षा किसी भी पाठशाला व गुरुकुल में मिलना लगभग असंभव है !"

~ आचार्य उदय

Thursday, June 25, 2015

मित्रता

"सच्ची मित्रता वह नहीं जो मित्र की पुकार का इंतज़ार करे बल्कि सच्ची मित्रता तो वह है जो मित्र की चीख अथवा कराह सुनकर ही मदद के लिए दौड़ पड़े !"

~ आचार्य उदय