Friday, July 17, 2015

पूर्णता

"प्रेम की पूर्णता जिसे हम प्रेम करते हैं उसे पा लेने में नहीं है ... वरन उसे निरंतर प्रेम करते रहने में है... क्योंकि प्रेम अमिट है, नश्वर है, अमर है !"

~ आचार्य उदय

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