Friday, July 24, 2015

सिद्धि

"प्रभु, मैं सिद्धि प्राप्त करना चाहता हूँ !
अरे, … वाह, … क्या करोगे सिद्धि प्राप्त कर ?
सम्पूर्ण जगत को जीतना चाहता हूँ !!
सुन्दर, अतिसुन्दर, तो सुनो ... जिस दिन तुम स्वयं को जीत लोगो उसी दिन यह समझ लेना की जगत को जीत लिया अर्थात सिद्धि प्राप्त कर ली !
प्रभु, कुछ समझा नहीं ?
अभिप्राय यह है कि - इस मायावी संसार में यदि कोई सबसे सरल कार्य है तो वह स्वयं को सिद्ध करना है तथा ठीक इसके विपरीत भी यदि सबसे कठिन कोई कार्य है तो वह भी स्वयं को सिद्ध करना ही है ... अर्थात स्वयं को सिद्ध कर लेना ही सिद्धि प्राप्त कर लेना है, जगत को जीत लेना है !!"

~ आचार्य उदय

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