Wednesday, July 29, 2015

मंगल दोष ... या भय व भ्रम का मायाजाल ?

अक्सर हम ऐंसा सुनते रहते हैं, सुनते आये हैं कि - फलां व्यक्ति की कुण्डली में मंगल दोष है, फलां व्यक्ति मांगलिक है, या फलां व्यक्ति की कुण्डली मांगलिक है ! ... ऐंसा सुनते ही तनिक देर खौफ जैसा वातावरण बन जाता है, इस खौफरुपी भय व भ्रम के वातावरण को दूर करने की भावना से ही इस विषय पर चर्चा करना उचित समझ कर चर्चा कर रहा हूँ !

ज्योतिष के क्षेत्र में मंगल का खौफ कोई साधारण खौफ नहीं है अर्थात उसके नाम से लोगों के विवाह होते होते रुक जाते हैं, मंगल लोगों के विवाह में बाधक बन कर खड़ा हो जाता है, लोगों के वैवाहिक जीवन में शंका के बादल मंडराने लगते हैं, इस खौफरुपी भय व भ्रम की वजह से कईयों पारिवारिक व सामाजिक रिश्तों में खटास पड़ जाती है !

इस तनाव अर्थात खटास की वजह कोई और नहीं होती वरन विद्धान ज्योतिषियों द्वारा मंगल के नाम से व्याप्त किया गया भय व भ्रम होता है ! ... यहाँ मैं यह भी स्पष्ट करना चाहूंगा कि - मेरे कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि मंगल ग्रह गाय की तरह सीधा-साधा है, तो दूसरी ओर मेरा तात्पर्य यह भी नहीं है कि साँप को साँप न मानकर उससे खिलौने की तरह खेला जाए !

अब हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैं, बात दरअसल यह है कि जब किसी भी जातक अर्थात व्यक्ति की कुण्डली बनाई जाती है तो उसमें बारह खानों का निर्माण किया जाता है, या यूँ कहें कि कुण्डली होती ही है बारह खानों अर्थात घरों की ... जब किसी जातक की कुण्डली में, बारह घरों में से 1, 4, 7, 8, 12 वें घर में मंगल की उपस्थिति होती है तो उसे मंगल दोष, या मांगलिक मान लिया जाता है !

यहाँ पर मैं आपका ध्यान केन्द्रित करना चाहूँगा कि - कुण्डली के बारह घरों में से उपरोक्त पाँच घरों में मंगल ग्रह का होना विद्धान ज्योतिषियों की नजर में मंगल दोष माना गया है ... अर्थात सीधे तौर पर कहूं तो बारह में से पाँच घरों में अर्थात लगभग चालीस प्रतिशत घर ... वाह, गजब !!

तात्पर्य यह कि - व्यवहारिक नजरिये से देखा जाए तो लगभग चालीस प्रतिशत लोग मांगलिक अर्थात कदम कदम पर मांगलिक ... अरे भाई, बारह घरों में से पाँच घर, हुए न अपने आप में चालीस प्रतिशत ! सौ में से चालीस प्रतिशत, फिर दोष किस बात का, दोष तो हम उसे कहते जब सौ में से दो, चार, या छ: लोगों में पाया जाता ! धन्य है विद्धान ज्योतिषियों की माया ... सीधे तौर पर कहूं तो यह भय और भ्रम का एक जीता जागता उदाहरण है !!

इस भय और भ्रम को दूर करने के नजरिये से मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि मंगल ग्रह कोई अजूबा ग्रह नहीं है वरन पृथ्वी, बुध, शुक्र, चन्द्र के जैसा ही ग्रह है, फर्क है तो स्वाभाविकता व प्राकृतिकता का है ! अत: प्रत्येक जातक की कुण्डली में मंगल का फलादेश करते समय उसकी स्वाभाविकता व प्राकृतिकता के आधार पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित व न्यायसंगत होगा !

जब एक ही परिवार में जन्में सगे भाइयों में, या सगे भाईयों व बहनों में आपसी तालमेल नहीं बैठ पाता है तो स्वाभाविक है दो अलग अलग परिवारों में जन्में व पले-बड़े हुए लड़का व लड़की जब शादी के बंधन में बंधकर पति-पत्नी बनते हैं तो उनमें आपस में तालमेल बैठने में समय तो लगेगा ही, फिर इसके लिए सीधे तौर पर मंगल को दोषी क्यों माना जाए ?... पर हाँ, यदि कुण्डली में मंगल के गुण-दोष का सही आंकलन कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए तो, बिगड़े हुए या बिगड़ते हुए रिश्तों को एक नई सकारात्मक दिशा जरुर दी जा सकती है !!

~ आचार्य उदय

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