"माता-पिता
... न सिर्फ हमारे प्रथम गुरु होते हैं वरन वे हमारे अंगरक्षक भी होते
हैं, एक मात्र वे ही हैं इस मायावी संसार में जो अपने पुत्र-पुत्री रूपी
शिष्यों के कल्याण के लिए निस्वार्थरुप से सदैव जागरुक व प्रार्थनारत रहते
हैं !"
~ आचार्य उदय
~ आचार्य उदय
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