आचार्य उदय
Wednesday, July 29, 2015
प्रेम
"यदि प्रेम सवालों से घिरा है, संदेहों से ग्रसित है, तो वह प्रेम नहीं है … वह भय है, भ्रम है, छल है, … प्रेम तो समर्पण है, विश्वास है, … अगर विश्वास व समर्पण नहीं है तो फिर कुछ नहीं है !"
~ आचार्य उदय
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