Saturday, December 5, 2015

चैन-बेचैन

"प्रभु, कोई कहानी सुनाओ आज मन बेचैन है ... अच्छा, ... क्या बात है, ... बहुत खूब, ... तो सुनो …

एक व्यक्ति बड़े गुस्से में तन-तनाते हुए जा रहा था … मैंने पूँछा - क्यों मियाँ कहाँ जा रहे हो ? … इस दुनिया में कहीं चैन नहीं है इसलिये मरने जा रहा हूँ …

वाह, अतिसुन्दर, क्या ख्याल हैं, ... अच्छा तो जाते जाते एक बात बताते जाओ … पूंछो, मुझे बहुत जल्दी है …
जल्दी, बहुत खूब … अगर मर कर भी चैन न मिला तो किधर जाओगे ?"

~ आचार्य उदय

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