Sunday, August 2, 2015

भोग व योग

"भोग व योग … दोनों का प्रतिफल संतुष्टि प्रदायक है ... फर्क है तो सिर्फ इतना है कि … भोग का प्रतिफल क्षणिक व व्यक्तिगत है ... तो दूसरी ओर योग का प्रतिफल व्यापक होने के साथ साथ व्यक्तिगत व सामाजिक दोनों है !"

~ आचार्य उदय

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