आचार्य उदय
Tuesday, September 29, 2015
सफर
"वैसे तो … सफर अकेले का ही है … अगर दो-चार … मिलते, चलते, गुजरते रहें … तो जिंदगी का आनंद ही कुछ और है !"
~ आचार्य उदय
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