आचार्य उदय
Friday, June 26, 2015
सीख
"इस मायावी संसार में ... प्रचलित किसी भी विधा, किसी भी धर्म, किसी भी संस्कृति को नजर अंदाज करने का तात्पर्य ... स्वयं को कुछ सीखने अथवा जानने से वंचित करना है !"
~ आचार्य उदय
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